Category Archive: कबिता

Aug 14

भीमसेन राग:केराग; ताल:एकताल

केरागः हे हे हे ……………नां हाई नाहाई नाहाई नाहांई रे नाइन ताहाहै… नाइ नाई नाहाई न वस गुन ल्हाना नबिज्याक भीम राजा ।।धु।। हे पञ्च पाण्डौ परीजन दुरपति सहीतन। हर्षन रस नबिज्याहाक भीमराजा (वस गुन)।।१।। हे लुमतुक लुँतायल लूँ चुरी लूँ पायल। स्वभाजुल अनेगु तिसाँहान भीम राजा (वस गुन)।।२।। हे कोति कोति सुर्ज उती छि …

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Aug 13

तन मामी; राग:आसावरी; ताल:जति

आशावरीः हे न न नांइन ता… हा… इ नानं नाई नाहा इ रे नाइन ताहाई नांइ नांइ नांइ नं तन माहामी, देव सकलेन)२ गिलीली हाला लपु देवसं। लोक नाथया नन्दे कुन्दे)२ सेखी नारायण गरुद्र महादेव देस्त पुरिसं सिखाली माजुं नेपाल रक्षायना बिज्याक ।।१।। न्हुछे काक्वसं नाग राजा)२ क्वयनास गणस्पति देवसं। देसं चोभा लोकेश्वर)२ क्रितापुरीस देव …

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Aug 12

नित्य नाथ “राग:केराग, ताल:चो”

केरागः हे हे हे ……………नां हाई नाहाई नाहाई नाहांई रे नाइन ताहाहै… नाइ नाई नाहाई न (नित्य नाथ)२ तुम्हारी शरण आव, (हे सबको उधार)२ सर्ब महादेब (नित्य नाथ)।।१।। अतिति सुन्दर हे बाजन सोह् भे। (हे व बिनान मेब)२ क्रिपा कह् रु(नित्य नाथ)।।२।। तोहे परमे श्वर गुरु नित्य नाथ, दरशन कारण आया हे ।।धू।। नन्दे भिं …

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Oct 09

जीबन कति रँगिन छ।

जीबन, कति रँगिन छ। यहाँं खुशी छ र दु:ख पनि।। जन्म छ र मृत्‍यु पनि।।। जीबन यो जीबन कति रँगिन छ… साथ छ यहाँं त बिछोड पनि । माया छ यहाँं त ढोका पनि ।। हासो छ यहाँं त बिछोड पनि।।। जीबन यो जीबन कति रँगिन छ… रिस छ यहीं त राग पनि । त्रिश्नाको …

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