केरागः
हे हे हे ...............नां हाई नाहाई नाहाई नाहांई रे नाइन ताहाहै... नाइ नाई नाहाई न
(नित्य नाथ)२ तुम्हारी शरण आव, (हे सबको उधार)२ सर्ब महादेब (नित्य नाथ)।।१।। अतिति सुन्दर हे बाजन सोह् भे। (हे व बिनान मेब)२ क्रिपा कह् रु(नित्य नाथ)।।२।। तोहे परमे श्वर गुरु नित्य नाथ, दरशन कारण आया हे ।।धू।। नन्दे भिं भीं सब नाचक नाना रँगे, गौरी शंकर आया हे (तोहे) ।।१।। गौरी कैलाश मे मनोहर बहासी, मनोरथ पुरण किजि हे (तोहे) ।।2।। भक्ति भावक अनाथ जि गावक, ईश्वरकी चरणमे ध्यान करो (तोहे) ।।3।।


