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Aug 19

श्री गणपति

श्री जय गणस्पति थुली छिके जीविमति
बिग नबि पतियाव नाँ हाहाव।।धू।।

चरनछी चरनस छिके जिन फोहने रे।
कलः जोसर रे हादे कलः जोसे सफुलिजो नाहाहाव (श्री जय) ।।१।।

लिढि सिढि फल बिव करुणा तया हाव रे।
बिव जीत रे हादे बिवजीत बास थव थाहाहास (श्री जय) ।।२।।


अन्तर छेनी पति जोग प्रकाहास रे।
गण पतिरे हादे गणपति छिके गति नाहाहाव (श्री जय) ।।३।।
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