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Aug 30

भैरव; रागः केराग, तालः जति

केरागः
हे हे हे ...............नां हाई नाहाई नाहाई नाहांई रे नाइन ताहाहै... नाइ नाई नाहाई न
हे भवानीया चरनंहस भजहानी याय भइरव दरसहन याय ।।धु।।

हे दिविगन मुनाकाहाब अतिस्वहभा लाक।।
हे जब खव मुना_काहाव हर्षन बिज्याक भइरव दरसहन याय।।१।।

हे भयंकाल ख्वाल_म्हया सुराजहया त्यहज।।
हे सिलसम तुक_लुँहया किकीपाहया स्वाँन भइरव दरसहन याय।।२।।

हे गल_ससि लया_माहाल हाल_मुर्तिया स्वभाव।।
हे ब्यताल आसन याहाय हरषन बिज्याक भइरव दरसहन याय।।३।।

हे जवन तिसुरया गंहगा खबनह सुर्जया मुर्ति।।
हे निगुमी गंगाया होंहन थास अहन देवि बिज्यहात भइरव दरसहन याय।।४।।

हे नेपालया छत्रपहति सिरि रहन बहादुर।।
हे नेपालया भुपति पाहाल हरख नबिज्याहाक भइरव दरसहन याय।।४।।
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